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DGCA ने यात्रियों के जरुरतों को ध्यान में रखते हुए दिया संशोधन का प्रस्ताव, गृह मंत्रालय के अधीन है मंजूरी

DGCA ने यात्रियों के लिया...- India TV Hindi News
Photo:IANS DGCA ने यात्रियों के लिया दिया संशोधन का प्रस्ताव

नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) के विमानन नियामक ने भारत में नॉन-शेड्यूल्ड यात्री उड़ानों के संचालन के लिए एयर ऑपरेटर परमिट (एओपी) के अनुदान के लिए न्यूनतम जरूरतों में संशोधन का प्रस्ताव दिया है। नॉन-शेड्यूल्ड यात्रियों को भारत में विधिवत पंजीकृत एकल या कई इंजन वाले हवाई जहाज, सीप्लेन और हेलीकॉप्टर का उपयोग करके ले जाया जा सकता है। इसमें ग्लाइडर, हॉट-एयर बैलून, एयरशिप और माइक्रो लाइट एयरक्राफ्ट भी शामिल हैं।

गृह मंत्रालय के अधीन है मंजूरी

मसौदा प्रस्ताव में कहा गया है कि एओपी का अनुदान और निरंतरता गृह मंत्रालय से सुरक्षा मंजूरी के अधीन है। किसी भी स्तर पर एमएचए द्वारा सुरक्षा मंजूरी को अस्वीकार करने या वापस लेने पर एओपी के लिए आवेदन को अस्वीकार कर दिया जाएगा और यदि एओपी पहले से ही जारी किया गया है, तो उसे वापस ले लिया जाएगा।

डीजीसीए ने कहा कि गृह मंत्रालय (एमएचए) सुरक्षा मंजूरी देने के लिए सक्षम प्राधिकारी है। सुरक्षा मंजूरी के अनुदान या नवीनीकरण के लिए अनुरोध नागरिक उड्डयन मंत्रालय को ईसहज पोर्टल के माध्यम से पेश किया जाएगा।

इन शर्तों को करना होगा पूरा

कंपनी और निदेशक मंडल के लिए सुरक्षा मंजूरी की वैधता एओपी की वैधता के साथ सह-टर्मिनस होगी और एओपी के नवीनीकरण के लिए एक नई सुरक्षा मंजूरी की जरूरत होगी। इसके अलावा, नॉन-शेड्यूल्ड हवाई परिवहन सेवा शुरू करने के उद्देश्य से विमान के आयात/अधिग्रहण को समय-समय पर संशोधित हवाई परिवहन परिपत्र 02/2017 द्वारा नियंत्रित किया जाएगा।

नॉन-शेड्यूल्ड संचालन के उद्देश्य से आयात किए गए विमान को भारत के भीतर एक पार्टी को निजी उद्देश्यों के लिए उपयोग करने के इरादे से नहीं निपटाया जाएगा, जब तक कि सीमा शुल्क प्राधिकरण से मंजूरी प्राप्त नहीं की जाती है।

आवेदक के पास कम से कम एक विमान या तो एकमुश्त खरीद के द्वारा या वाणिज्यिक शुष्क पट्टे के माध्यम से होना चाहिए। विमान भारत में पंजीकृत होना चाहिए और उसके लिए सामान्य यात्री श्रेणी में उड़ान की योग्यता का प्रमाणपत्र होना चाहिए। यह भी कहा गया है कि विमान के आयात या अधिग्रहण के लिए आवेदक को डीजीसीए से अनुमति लेनी होगी।

DGCA के आदेश पर एयर इंडिया ने उठाया था कदम

एयर इंडिया (Air India) उड़ान समय सारणी में बदलाव या देरी के बारे में यात्रियों को पहले से जानकारी उपलब्ध करने के लिये नई व्यवस्था स्थापित करेगी। साथ ही कंपनी हवाईअड्डे से संबंधित मुद्दों के समाधान को समन्वय टीम भी स्थापित करेगी। कंपनी द्वारा आंतरिक तौर पर जारी सूचना में यह कहा गया है। विभिन्न कार्यों की समीक्षा के बाद टाटा के स्वामित्व वाली एयर इंडिया ने प्रदर्शन को बेहतर बनाने के लिये सुधार वाले क्षेत्रों की पहचान की है। 

एयर इंडिया के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) और प्रबंध निदेशक कैम्पबेल विल्सन ने आंतरिक स्तर पर जारी सूचना में कहा कि एयरलाइन सुधार करने के लिये हवाईअड्डा ‘स्लॉट’ मांगेगी। उन्होंने कहा कि एयरलाइन ‘स्लॉट’ के स्तर पर जो बदलाव चाहती है, उसमें सभी इस सत्र में मिलना मुश्किल है लेकिन हम जानते हैं, हमें क्या करना है। हम सत्र-दर-सत्र इस मामले में आगे बढ़ेंगे। जुलाई महीने में घरेलू बाजार में 8.4 प्रतिशत हिस्सेदारी रखने वाली एयरलाइन हवाईअड्डे से संबंधित मुद्दों को बेहतर तरीके से समझने के लिये एक हवाईअड्डा/केंद्र नियंत्रण/क्षेत्रीय नियंत्रण समन्वय टीम भी स्थापित करेगी। 

बदलाव से पहले दी जाएगी सूचना

सूचना के अनुसार, एयरलाइन की हवाईअड्डा संचालन टीम कामकाज और प्रदर्शन में सुधार के लिये रखरखाव कार्यों से जुड़े भागीदारों के साथ मिलकर काम कर रही है। इसमें कहा गया है, ‘‘हम अपने ग्राहकों को बेहतर सुविधा देने के लिये व्यवस्था बना रहे हैं। इसमें यात्रियों को उड़ान समयसारणी में बदलाव या देरी के बारे में पहले ही सूचना देना शामिल है। साथ ही जहां भी उपयुक्त हो, उड़ानों में स्वयं से बदलाव की सुविधा भी दी जाएगी।’’ टाटा ने एयर इंडिया का इस साल जनवरी में अधिग्रहण किया था।

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