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Alcohol Detection System In Cars Soon | शराब पीकर की ड्राइविंग तो कार को चल जाएगा पता, नशे में होंगे तो नहीं होगी स्टार्ट

शराब पीकर की ड्राइविंग तो कार को चल जाएगा पता, नशे में होंगे तो नहीं होगी स्टार्ट

ड्रिंक एंड ड्राइव के मामलों में कमी लाने के लिए अब कई संस्थाएं सामने आ रही हैं। हाल ही में अमेरिका की राष्ट्रीय परिवहन सुरक्षा बोर्ड (NTSB) ने एक ऐसी तकनीक विकसित की है जो कार में ड्राइवर के शराब के नशे में होने का पता लगाएगा। यह डिटेक्शन सिस्टम सभी तरह की कारों के सभी वेरिएंट में स्टैंडर्ड तौर पर लगाया जा सकता है।

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इस डिटेक्शन सिस्टम के लिए कार के अंदर कई कैमरों और सेंसर का उपयोग किया जाता है। कार के अंदर लगे कैमरे और सेंसर ड्राइवर के हावभाव और प्रतिक्रिया की जांच करते रहते हैं। नशे में होने की स्थिति में यह सिस्टम ड्राइवर के व्यवहार में बदलाव को भांप लेता है और उसे सावधान करने के लिए तेज आवाज में अलार्म बजता है या गाड़ी की रफ्तार को धीरे-धीरे कम करते हुए उसे रोक देता है।

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यह सिस्टम ठीक वैसे ही काम करता है जैसे कार में नींद का पता लगाने वाली सिस्टम करती है। जानकारी के मुताबिक, इस नए सिस्टम को और प्रभावी बनाने के लिए इसपर शोध किए जा रहे हैं। विशेषज्ञों को उम्मीद है कि परीक्षण पूरा होने के बाद जल्द ही इस सस्टम का इस्तेमाल कार में दुर्घटनाओं को रोकने के लिए किया जाएगा।

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एनटीएसबी की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका में हर दिन शराब के नशे में ड्राइविंग करने के कारण 32 लोग अपनी जान गंवा देते हैं। वहीं साल भर में ड्रिंक एंड ड्राइव के मामलों में मरने वालों का आंकड़ा 11,000 तक पहुंच जाता है। 2021 में अमेरिका में ड्रिंक एंड ड्राइव के मामले 5 प्रतिशत बढ़े हैं।

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भारत में भी शराब के नशे में ड्राइविंग सड़कों पर लोगों की सुरक्षा के लिए एक बड़ी चुनौती है। भारत में साल 2020 में शराब के नशे में ड्राइविंग करने के मामलों में कुल 8,300 लोगों की मौतें दर्ज की गईं, जो कि एक बड़ा आंकड़ा है।

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दुनिया भर में सड़क दुर्घटनाओं के मामलों को देखें तो, भारत में सड़क हादसों में मरने वाले लोगों की संख्या सबसे अधिक है। भारत में हर साल औसतन 1.5 लाख लोग सड़क दुर्घटनाओं में अपनी जान गंवा देते हैं। साल 2020 के दौरान सड़क हादसों में कुल 1,20,806 लोगों की मौत हुई। इन हादसों के शिकार अधिकतर युवा थे।

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2020 के सड़क हादसों के रिपोर्ट में ओवरस्पीडिंग को दुर्घटनाओं का मुख्य कारण बताया गया। अधिक स्पीड में गाड़ी चलाने से 69.3% दुर्घटनाएं हुईं, वहीं सड़क के गलत साइड में ड्राइविंग करने के मामलों में 5.6% दुर्घटनाएं हुईं। सड़क हादसों में शामिल वाहन श्रेणियों में सबसे ज्यादा संख्या दोपहिया वाहनों की थी। जबकि कार, जीप और टैक्सी जैसे हल्के वाहन एक साथ दूसरे स्थान पर हैं।





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