Indian कंपनियों का मुनाफा दूसरी तिमाही में घटने का अनुमान, महंगाई ने बढ़ाया बोझ

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Photo:FILE Indian companies

Highlights

  • रिपोर्ट 47 क्षेत्रों की 300 कंपनियों पर किए गए शोध के आधार पर तैयार की गई है
  • सूचीबद्ध कंपनियों के मुनाफे में गिरावट की यह लगातार चौथी तिमाही होगी
  • दूसरी तिमाही के दौरान आय में सालाना आधार पर 15 प्रतिशत की वृद्धि होने की उम्मीद

Indian कंपनियों का मुनाफा जुलाई-सितंबर तिमाही में सालाना आधार पर तीन प्रतिशत घट सकता है। एक रिपोर्ट में बुधवार को यह बात कही गई है। रेटिंग एजेंसी क्रिसिल की शोध इकाई ने कहा कि सूचीबद्ध कंपनियों के मुनाफे में गिरावट की यह लगातार चौथी तिमाही होगी। रिपोर्ट के मुताबिक, ‘‘जिंस (कमोडिटी) कीमतों में बढ़ोतरी के कारण मुनाफे में तीन प्रतिशत की गिरावट देखी जा रही है।’’ यानी महंगाई के कारण कंपनियों की उत्पादन लगात बढ़ी है। जिसका असर उनके मुनाफा पर हो रहा है। यह रिपोर्ट 47 क्षेत्रों की 300 कंपनियों पर किए गए शोध के आधार पर तैयार की गई है।

कंपनियों ने रिजल्ट की घोषणा शुरू कर दी

क्रिसिल रिसर्च के संयुक्त निदेशक सेहुल भट्ट ने कहा, ‘‘आय में हो रही बढ़ोतरी मुनाफे में नहीं दिख रही है।’’ रिपोर्ट में कहा गया कि चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही के दौरान आय में सालाना आधार पर 15 प्रतिशत की वृद्धि होने की उम्मीद है। उल्लेखनीय है कि चालू सप्ताह से प्रमुख कंपनियां ने जुलाई-सितंबर तिमाही के लिए अपने परिणामों की घोषणा शुरू कर दी है।

विप्रो का शुद्ध लाभ घटकर 2,649 करोड़ रुपये

सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) कंपनी विप्रो लिमिटेड का चालू वित्त वर्ष की दूसरी जुलाई-सितंबर तिमाही का शुद्ध लाभ 9.6 प्रतिशत घट गया। कंपनी ने बताया कि गैर-अमेरिकी बाजारों में आय घटने के चलते उसके शुद्ध लाभ में कमी हुई। कंपनी ने बुधवार को बयान में कहा कि वित्त वर्ष 2022-23 की जुलाई-सितंबर तिमाही में उसे 2,649.1 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ हुआ, जबकि एक साल पहले इसी अवधि में यह आंकड़ा 2,930.6 करोड़ रुपये था। समीक्षाधीन तिमाही में कंपनी की आय बढ़कर 22,539.7 करोड़ रुपये हो गई, जो एक साल पहले इसी अवधि में 19,667.4 करोड़ रुपये थी। विप्रो ने कहा कि दूसरी तिमाही में गैर-अमेरिकी बाजारों में उसकी आय में गिरावट हुई है। यूरोप में कमाई एक साल पहले के 918.6 करोड़ रुपये से घटकर समीक्षाधीन अवधि में 787.5 करोड़ रुपये रह गई। इसी तरह एशिया प्रशांत, पश्चिम एशिया, अफ्रीका (एपीएमईए) क्षेत्र में आय घटकर 219.4 करोड़ रुपये रह गई, जो पिछले साल की समान अवधि में 302.8 करोड़ रुपये थी।

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