मैनपुरी में मुलायम की विरासत, रामपुर में आजम की सियासत दांव पर, UP के उपचुनाव तय करेंगे दिशा

यूपी में उपचुनाव- India TV Hindi News

Image Source : FILE PHOTO
यूपी में उपचुनाव

उत्तर प्रदेश में दो सीटों पर विधानसभा और एक सीट में लोकसभा के उपचुनाव होने हैं। यह चुनाव सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों के लिए लिटमस टेस्ट साबित होंगे। 2024 में यहां लोकसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में उपचुनाव के नतीजे पार्टियों की दशा और दिशा तय करने में मददगार होंगे। मैनपुरी में मुलायम की विरासत और रामपुर में आजम की सियासत दांव पर है। खतौली सीट विधायक की सदस्यता जाने से उसे वापस लेने का दबाव बीजेपी पर है। 

तीनों सीटों के उपचुनाव परसेप्शन की लड़ाई

राजनीतिक पंडितों की मानें तो बीजेपी और सपा के लिए यह तीनों सीटों के उपचुनाव परसेप्शन की लड़ाई है। मैनपुरी सीट की बात करें तो इस सीट पर यादव बाहुल्य होने के चलते बीते ढाई दशक से मुलायम परिवार का कब्जा रहा है। बीजेपी 2024 के हिसाब से यादव लैंड कहे जाने वाले इन क्षेत्रों पर काफी दिन से काम कर रही है। इसी वजह से उसने पहले एटा से हरनाथ यादव को राज्यसभा भेजने के बाद सुभाष यदुवंश को युवा मोर्चा का अध्यक्ष बनाया था। फिर एमएलसी बनाकर इस वोट बैंक को अपनी ओर खींचने कोशिश में लगी है।

बीजेपी की नजर सपा के कोर यादव वोटबैंक पर

बीजेपी ने लोकसभा चुनाव में 80 सीटों का टारगेट रखा है। जिसे हासिल करने के लिए उसने बड़ी लकीर खींची है। 2022 विधानसभा चुनाव के बाद से ही बीजेपी की नजर सपा के कोर यादव वोटबैंक पर है। बीजेपी ने दिनेश लाल यादव उर्फ निरहुआ के जरिए सपा के मजबूत आजमगढ़ में जीतने के बाद 2024 में यादव बेल्ट में भी ‘कमल’ खिलाने की रणनीति बनाई है। ऐसे में मुलायम के करीबी रहे चौधरी हरिमोहन यादव के पुण्यतिथि के जरिए बीजेपी मिशन 2024 को पूरा करने के लिए सपा के यादव वोट बैंक में सेंधमारी करने का चक्रव्यूह रचा है।

जौनपुर से जीते गिरीश यादव, मंत्री परिषद में दोबारा जगह

बीजेपी के एक वरिष्ठ पदाधिकारी की मानें तो कानपुर से लेकर इटावा, कन्नौज, फरुर्खाबाद फिरोजाबाद और आगरा तक एक समय चौधरी हरमोहन सिंह का यादव वोट बैंक पर दबदबा रहा है। विधानसभा चुनाव में हरमोहन के पौत्र मोहित यादव को बीजेपी में शामिल कर अपने पक्ष में महौल बनाने का प्रयास हुआ। इसके बाद हरमोहन की पुण्य तिथि में पीएम का वर्चुअल शामिल होना यादव वर्ग के लिए बड़ा संदेश था। इसके साथ ही यादव वोटों को साधने में जुटी बीजेपी ने जौनपुर सीट से जीते गिरीश यादव को मुख्यमंत्री योगी ने अपनी मंत्री परिषद में दोबारा जगह दी है।

राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो आजमगढ़ और रामपुर लोकसभा सीट उपचुनाव में सपा को हराने के बाद बीजेपी के हौंसले बुलंद हैं। हाल ही में गोला विधानसभा सीट पर पार्टी फिर सपा को मात दे चुकी है। अब नजरें मैनपुरी लोकसभा और रामपुर विधानसभा सीटों पर है। मैनपुरी में बीजेपी की कोशिश किसी भी तरह गैर-यादव और गैर-मुस्लिम वोटों का ध्रुवीकरण करने की है। प्रदेश महामंत्री संगठन धर्मपाल पिछले दिनों मैनपुरी में कार्यकर्ताओं का फीडबैक लेने के साथ ही पूरी ताकत से चुनावी तैयारियों में तेजी से जुटने को कहा है। बीजेपी को पता है कि अगर इन चुनावों में जीत हासिल कर ली तो लोकसभा चुनाव तक जोश बरकरार रहेगा।

मैनपुरी से चुनावी मैदान में अखिलेश यादव की पत्नी डिंपल 

वहीं, बात अगर समाजवादी पार्टी की करें तो मैनपुरी और रामपुर उनकी उनकी परंपरागत सीट रही है। मैनपुरी से अखिलेश ने अपनी पत्नी डिंपल को चुनावी मैदान में उतार कर एक तीर से कई निशाने साधे हैं। अखिलेश ने अपनी विरासत बचाने और कोर वोटर को संभालने के लिए यह दांव चला है। रामपुर आजम खान का गढ़ है। वहां से उनकी सदस्यता रद्द होने के बाद वहां के उपचुनाव की जिम्मेदारी अभी फिलहाल उन्हीं के कंधो पर लग रही है। सपा सूत्रों की मानें तो उनके परिवार या कोई अन्य उन्हीं का खास आदमी चुनाव लड़ सकता है, क्योंकि आजम खान यहां से कई बार के विधायक हैं।

अब चुनाव में सपा की जीत अखिलेश की व्यक्तिगत प्रतिष्ठा से जुड़ी है। ऐसा इसलिए भी कि अखिलेश के गढ़ में सपा अगर हारी तो यह उसका व्यक्तिगत नुकसान होगा, लेकिन यहां बीजेपी अगर सपा से सीट छीन लेती है, तो यह उसके लिए अतिरिक्त लाभ माना जाएगा।

राष्ट्रीय अध्यक्ष मैनपुरी, रामपुर सीट पर रणनीति बना रहे: सपा नेता 

सपा के एक वरिष्ठ नेता ने बताया कि समाजवादी पार्टी पूरी ताकत से चुनाव मैदान में हैं। पिछले चुनाव के नतीजे से सीख लेते हुए राष्ट्रीय अध्यक्ष मैनपुरी और रामपुर सीट पर रणनीति बना रहे हैं। खुद प्रचार करने जाएंगे। परिवार की एकता के लिए तेज प्रताप और धर्मेंद्र यादव को लगाया गया है। वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक पीएन द्विवेदी कहते हैं कि यूपी की तीनों सीटों पर हो रहे उपचुनाव सत्तारूढ़ और विपक्षी दल के लिए अहम है। इसके नतीजे लोकसभा चुनाव की दशा दिशा तय करेंगे। ये चुनाव एक प्रकार से सभी दलों के लिए लिटमस टेस्ट साबित होंगे।

Latest Uttar Pradesh News





Source link

By Ashish Borkar

“l still believe that if your aim is to change the world, journalism is a more immediate short-term weapon.”

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *