स्वच्छ ऊर्जा के लिए 300 मेगावाट क्षमता वाले बनेंगे छोटे मॉड्यूलर रिएक्टर, जानिए इससे देश को कितना होगा फायदा

300 मेगावाट क्षमता वाले बनेंगे छोटे मॉड्यूलर रिएक्टर- India TV Hindi
Photo:PTI 300 मेगावाट क्षमता वाले बनेंगे छोटे मॉड्यूलर रिएक्टर

भारत स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन की अपनी प्रतिबद्धता को पूरा करने के लिए 300 मेगावाट क्षमता वाले छोटे मॉड्यूलर रिएक्टरों (एसएमआर) के विकास के लिए कदम उठा रहा है। रविवार को केंद्रीय विज्ञान और परमाणु ऊर्जा राज्यमंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि भारत में इस महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकी के विकास में निजी क्षेत्र और स्टार्टअप को भागीदारी करने की जरूरत है। 

300 मेगावाट तक की क्षमता वाले छोटे मॉड्यूलर रिएक्टर

एसएमआर प्रौद्योगिकी की वाणिज्यिक उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए प्रौद्योगिकी साझाकरण और फंड की उपलब्धता दो महत्वपूर्ण लिंक हैं। 300 मेगावाट तक की क्षमता वाले छोटे मॉड्यूलर रिएक्टर (एसएमआर) प्राकृतिक रूप से डिजाइन में लचीले होते हैं और इसमें छोटे फुटप्रिंट की जरूरत होती है। मोबाइल और बेहतर तकनीक होने के कारण एसएमआर पारंपरिक परमाणु रिएक्टरों के विपरीत संयंत्रों में भी तैयार हो सकते हैं। इस प्रकार एसएमआर लागत और निर्माण समय में बहुत ही महत्वपूर्ण बचत करता है।

चौथे नंबर पर है भारत

एसएमआर औद्योगिक डी-काबोर्नाइजेशन के लिए भरोसेमंद तकनीक है, विशेष रूप से जहां बिजली की आवश्यक और निरंतर आपूर्ति जरूरी होती है। कहा जाता है कि बड़े परमाणु संयंत्रों की तुलना में एसएमआर सरल और सुरक्षित होता है। डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि देश में नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए अनेक उपाय किए गए हैं। भारत आज पूरे विश्व में नवीकरणीय ऊर्जा की स्थापित क्षमता में चीन, यूरोप और अमरीका के बाद चौथे नंबर पर है। उन्होंने कहा कि यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत वाले लक्ष्य के अनुरूप है, जहां भारत वैश्विक मूल्य श्रृंखला में अपना महत्वपूर्ण योगदान देता है।

विश्व की आबादी के 17 प्रतिशत लोग भारत में

भारत जहां पर विश्व की आबादी के 17 प्रतिशत लोग रहते हैं, उसने पिछले दशक में अपनी प्राथमिक ऊर्जा में 4 प्रतिशत की दर से बढ़ोतरी की है, जो कि वैश्विक विकास दर 1.3 प्रतिशत से लगभग दोगुना है। हालांकि, ऐतिहासिक रूप से वैश्विक उत्सर्जन में हमारी हिस्सेदारी 5 प्रतिशत से भी कम है।

केंद्र सरकार के मुताबिक, गैर-जीवाश्म आधारित ऊर्जा संसाधनों के लिए और 2070 तक पूर्ण रूप से शून्य प्राप्त करने के लिए स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन की दिशा में पहले ही कदम उठा चुके हैं। यह बेस लोड पावर के लिए परमाणु डी-काबोर्नाइजेशन रणनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। उन्होंने कहा कि परमाणु ऊर्जा न केवल भारत में बल्कि पूरे विश्व में स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

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