NASA, ESA से लेकर ISRO तक इस साल इन स्पेस मिशनों पर होगी दुनिया की नजर
अंतरिक्ष खोजों के लिए 2023 बहुत महत्वपूर्ण साबित होने वाला है। इस साल कई अंतरिक्ष मिशनों पर दुनिया की नजरें जमी रहेंगी। इनमें से कुछ मिशन भारतीय स्पेस एजेंसी ISRO के हैं तो कुछ स्पेस मिशन अमेरिकी स्पेस एजेंसी NASA लॉन्च करने वाली है। इसरो का चंद्रयान मिशन भी भारत के लिए महत्वपूर्ण मिशनों में से है। चलिए आपको बताते हैं कि स्पेस एक्सप्लोरेशन में दुनिया में स्पेस एजेंसियां क्या क्या तैयारियां इस साल के लिए कर रही हैं।

चंद्रयान-3
सबसे पहले भारत के चंद्रयान मिशन की बात कर लेते हैं। पिछले दिनों चंद्रयान-2 मिशन में इसरो ने एक महत्वपूर्ण खोज का दावा किया था। इसरो ने कहा था कि उसके चंद्रयान-2 ऑर्बिटर को चंद्रमा के ऊपरी वायुमंडल में एक महत्वपूर्ण गैस मिली है। इसरो ने बताया था कि चंद्रयान के ‘एटमॉस्‍फ‍िएरिक कम्‍पोजिशन एक्‍सप्‍लोरर-2′ (CHACE-2) उपकरण ने चंद्र एक्सोस्फीयर (बाहरी मंडल) में ‘आर्गन-40′ गैस का पता लगाया है। यह चंद्रमा के वातावरण का सबसे बाहरी क्षेत्र है, जहां परमाणु और अणु शायद ही कभी एक-दूसरे से टकराते हैं। चंद्रमा की सतह के नीचे रेडियोजेनिक गतिविधियों को समझने में भी यह ऑब्‍जर्वेशन मदद कर सकता है।

अब इसरो इसी खोज को आगे बढ़ाते हुए चंद्रयान-3 मिशन के लिए तैयार है। जून में चंद्रयान-3 (Chandrayaan-3) को लॉन्‍च किया जाएगा। यह चंद्रमा की सतह पर खोज को लेकर महत्‍वपूर्ण अभियान है। मिशन को मार्क-3 लॉन्‍च वीकल के जरिए लॉन्‍च किया जाएगा। इसरो के मुताबिक, उसने चंद्रयान-3 में कई बदलाव किए हैं। किसी भी इक्विपमेंट के फेल होने की सूरत में बाकी इक्विपमेंट इसकी भरपाई करेंगे। चंद्रयान-3 के लिए जिस रोवर को तैयार किया गया है, वह यात्रा की ऊंचाई को बेहतर तरीके से कैलकुलेट कर सकता था है साथ ही ऐसी जगहों से खुद को बचा सकता है, जहां खतरा होा।

आदित्य-एल-1
आदित्य एल-1 भारत के लिए महत्वपूर्ण मिशन है जिसके जरिए सूर्य के बारे में जानकारी इकट्ठा करने की कोशिश की जाएगी। इसके लिए 400 किलो की ऑब्जर्वेटरी को पहले लैगरेंज पॉइंट पर इंस्टॉल किया जाएगा। यह धरती से 15 लाख किलोमीटर की दूरी पर स्थित होगी। इससे सूरज में हो रही गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा सकेगी। Aditya L-1 मिशन सूरज के फोटोस्फीयर, क्रोमोस्फीयर और सबसे बाहरी परत कोरोना के बारे में सूचनाएं इकट्ठा करेगा।

यूरोपियन स्पेस एजेंसी का जूस मिशन (JUICE Mission) भी इसी साल लॉन्च होने वाला है। इसे एजेंसी अप्रैल में लॉन्च करेगी। यह 2031 तक अपनी मंजिल पर पहुंच जाएगा। यह मिशन बृहस्पति के चंद्रमाओं का अध्य्यन करने के लिए लॉन्च किया जाएगा। यह इसके चंद्रमाओँ यूरोपा, गैनीमेडे और कैलिस्टो की स्टडी करेगा। उनकी जमी हुई सतहों से जानकारी इकट्ठा करेगा।
NASA को भी इस साल बहुत ही महत्वपूर्ण मिशन पूरा होने का इंतजार है। नासा अपने OSIRIS-REx स्पेसक्राफ्ट के लौटने का इंतजार कर रही है। यह स्पेसक्राफ्ट 101955 Bennu नामक उल्का पिंड के सैंपल लेकर आने वाला है। नासा ने इसे 8 सितंबर 2016 में लॉन्च किया था। सितंबर 2023 में यह 60 ग्राम सैंपल लेकर लौटेगा। OSIRIS-REx इस उल्का पिंड तक अक्टूबर 2020 में पहुंचा था। इस उल्का पिंड का आकार 492 मीटर था।

By Gopi Soni

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