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तीर से बाघ को मारकर मांस खा गए शिकारी:खाल-नाखून बेचने निकले तो पुलिस ने पकड़ा, अब पूछताछ में किया खुलासा

छत्तीसगढ़ के कोंडागांव जिले में करीब 20 लाख रुपए के बाघ की खाल, नाखून और दांत के साथ 4 शिकारियों को पकड़ा गया है। करीब 4 महीने पहले इन्होंने ओरछा इलाके के जंगल में तीर से बाघ का शिकार किया था। फिर खाल, नाखून और दांत निकाले और मांस को खा लिए थे। अब बेचने निकले तो पुलिस ने इन्हें पकड़ लिया है। बाघ की उम्र करीब 3 साल थी। मामला जिले के बयानार थाना क्षेत्र का है।

पुलिस को सूचना मिली थी कि टेमरू गांव के नजदीक कुछ लोग बाघ की खाल बेचने के लिए निकले हैं। ग्राहक का जुगाड़ कर रहे हैं। इसी सूचना के बाद पुलिस की टीम मौके पर पहुंची। जवानों को देखकर सभी युवक यहां-वहां से भागने लगे। जिसके बाद चारों को पकड़कर थाना लाया गया।

4 महीने पहले किया गया था बाघ का शिकार, गिरफ्तार चार आरोपियों से जब्त बाघ की खाल, नाखून, दांत

4 महीने पहले किया गया था बाघ का शिकार, गिरफ्तार चार आरोपियों से जब्त बाघ की खाल, नाखून, दांत

नारायणपुर जिले के हैं सभी आरोपी

आरोपियों का नाम कारूराम गोटा (28), सोनू राम (41), देउराम उसेंडी (40), लखमु ध्रुव (35) है। सभी नारायणपुर जिले के ओरछा थाना क्षेत्र के रहने वाले हैं। इन्होंने पुलिस को बताया कि, गांव के जंगल में बाघ होने की खबर मिली थी। फिर उसे मारने की प्लानिंग की। जिसके बाद हरदिन बाघ को ढूंढने के लिए जंगल जाते थे। फिर एक दिन शाम के समय बाघ का शिकार किया। उस पर करीब 3 से 4 बार तीर से हमला किया गया। एक तीर पेट पर लगा। जिससे बाघ की मौत हो गई।

मांस खा लिए थे

खाल, दांत और नाखून निकाल कर मांस को पकाकर सभी शिकारी खा लिए थे। उसी ठिकाने पर बाघ की खाल को छिपाकर रखे हुए थे। शिकार के बाद से खाल बेचने के लिए ग्राहक की तलाश में जुटे हुए थे। अब एक दिन पहले बयानार इलाके में खाल के साथ ग्राहक ढूंढने आए तो पुलिस ने पकड़ लिया।

पुलिस गिरफ्त में चारों आरोपी, बाघ की खाल, नाखुन, दांत बेचने निकले थे तब हुई गिरफ्तारी।

पुलिस गिरफ्त में चारों आरोपी, बाघ की खाल, नाखुन, दांत बेचने निकले थे तब हुई गिरफ्तारी।

इंद्रावती टाइगर रिजर्व से आया था बाघ

एक महीने के अंदर बस्तर में यह दूसरे बाघ का शिकार है। इससे पहले बीजापुर जिले के एक गांव में शिकारियों ने इंद्रावती टाइगर रिजर्व में ही एक बाघ को मार दिया था। अब जिस बाघ का शिकार किया गया है वह भी इंद्रावती टाइगर रिजर्व का ही बताया जा रहा है। जो भटककर नारायणपुर के जंगल में पहुंच गया था।

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