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रविशंकर और विद्याचरण के दिलचस्प किस्से:CM ने बारातियों के लिए बनाई खिचड़ी, एक कांग्रेसी जिसके लिए बना R.S.S, सड़क पर घुमाते थे बाघ

सफेद टोपी पहने रविशंकर शुक्ल और दूसरी तस्वीर विद्याचरण शुक्ल की, मिंटो हॉल शपथ ग्रहण करते हुए रविशंकर शुक्ल की पुरानी फोटो।

मध्यप्रदेश के पहले मुख्यमंत्री रविशंकर शुक्ल और उनके बेटे विद्याचरण शुक्ल की आज जयंती है। आजादी के बाद पहले MP के पहले CM बने रविशंकर शुक्ल। बाद में उनके बेटे विद्याचरण शुक्ल केंद्र में इंदिरा गांधी की सरकार में कद्दावर मंत्री रहे। पिता-पुत्र की ये ऐसी जोड़ी है जिसमें दोनों की जयंती एक ही दिन मनाई जाती है।

प्रदेश के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा- रविशंकर ने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के राष्ट्रीय आंदोलनों में शीर्ष भूमिका निभाई। वे अच्छे वकील, राजनेता होने के साथ ही अच्छे वक्ता और लेखक भी थे। छत्तीसगढ़ की उन्नति और यहां सामाजिक सद्भाव बनाए रखने के लिए उनका प्रयास चिरकाल तक याद किए जाएंगे।

मुख्यमंत्री ने दोनों नेताओं की जयंती पर उन्हें याद किया।

मुख्यमंत्री ने दोनों नेताओं की जयंती पर उन्हें याद किया।

मुख्यमंत्री ने विद्याचरण को याद करते हुए कहा- विद्याचरण जी ने केन्द्रीय मंत्री के रूप में कई सालों तक छत्तीसगढ़ का प्रतिनिधित्व किया और देश के साथ-साथ छत्तीसगढ़ के विकास की राहें भी प्रशस्त की। भारत सरकार के मंत्री के रूप में उन्होंने संचार, गृह, रक्षा, वित्त, योजना, विदेश, संसदीय कार्य मंत्रालयों की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभाली। वह एक कुशल राजनेता और प्रशासक के रूप में जाने जाते हैं। रविशंकर शुक्ल और विद्याचरण शुक्ल की इस पिता पुत्र की जोड़ी के कई सामाजिक, पारिवारिक और राजनैतिक किस्से हैं। घर पर ये नेता कैसे थे। परिवार में क्या किया करते थे। उनके शौक कैसे हैं। दैनिक भास्कर की इस स्पेशल रिपोर्ट में वो तमाम किस्से और यादें साझा कर रहे हैं रविशंकर शुक्ल के पर पोते अनुभव शुक्ल। अनुभव, शुक्ल परिवार की 5वीं पीढ़ी के सदस्य हैं, बुजुर्गों से जो दिलचस्प बातें सुनी उन्होंने बताईं।

शिमला कॉन्फ्रेंस लॉर्ड वेवेल के साथ रविशंकर शुक्ल

शिमला कॉन्फ्रेंस लॉर्ड वेवेल के साथ रविशंकर शुक्ल

जब मुख्यमंत्री रविशंकर ने बनाई थी खिचड़ी
देश की आजादी के बाद रविशंकर शुक्ल 31 अक्टूबर 1956 की मध्यरात्रि में CM बने। तब MP के पहले राज्यपाल डॉ. पट्‌टाभि सीतारमैया को मुख्य न्यायाधीश मोहम्मद हिदायतुल्ला ने पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। इसके बाद राज्यपाल ने पं. रविशंकर शुक्ल को मुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाई।

अनुभव शुक्ल बताते हैं कि हमारे परदादा तब रविशंकर मुख्यमंत्री बन चुके थे उनके बेटे ईश्वरी चंद्र शुक्ल की शादी थी। बारात फतेहगढ़ गई हुई थी। रास्ते में बारात रुकी तो रात के वक्त उन्होंने अपने हाथों से मूंग दाल की खिचड़ी बनाई और सभी को अपने हाथों से प्रेम पूर्व खिलाया।

शुक्ल परिवार के अनुभव शुक्ल ने बताए रोचक किस्से।

शुक्ल परिवार के अनुभव शुक्ल ने बताए रोचक किस्से।

मुट्‌ठी न खोल पाए अंग्रेज अफसर
भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान उन्हें सिवनी जेल जाना पड़ा था। अनुभव ने बताया कि उस समय के जो वहां जेलर थे उन्होंने कहा अंगूठे के निशान लगवाओ। रविशंकर शुक्ल ने कहा हम राजनैतिक बंदी हैं कोई क्रिमिनल नहीं। हम अंगूठे के निशान नहीं देंगे। उन्होंने मुट्‌ठी में अंगूठा छिपाकर बंद कर लिया। 4-5 हवलदार जेल का स्टाफ आ गया। उन्हें जमीन पर पटककर अंगूठे का निशान लेने का प्रयास किया। झूमाझटकी होती रही, मगर रविशंकर की मुट्‌ठी न खोल पाए। बाद में मामला गर्वनर के पास गया तो उन्होंने राजनैतिक बंदियों के अंगूठे के निशान न लेने का आदेश दिया।

एक कांग्रेसी जिसके लिए बना R.S.S
किस्सा 27 सितंबर 1925 का है। जब विजयदशमी के दिन राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की स्थापना की गई। RSS की स्थापना के साथ ही देशभर में इसके स्वयं सेवक अपनी गतिविधियां तेज करने लगे थे। उसी दौरान जब सागर, मध्यप्रदेश में RSS का प्रचार हो रहा था तो वहां रह रहे पंडित रविशंकर शुक्ल के समर्थकों ने एक संगठन बनाया, जिसका नाम था RSS यानी रविशंकर शुक्ल संघ। इस संगठन ने तब सागर में कई सांस्कृतिक कार्यक्रम कराए, जो गैर राजनीतिक रहे।

महात्मा गांधी ने भेजा छत्तीसगढ़
MP के साहित्यकार और प्रोफेसर डॉ. सुरेश आचार्य ने दैनिक भास्कर से कहा था कि पंडित रविशंकर शुक्ल महात्मा गांधी के काफी करीब थे। बापू ने ही पं. शुक्ल को छत्तीसगढ़ कांग्रेस की कमान संभालने के लिए भेजा। गांधी के आदेश पर ही पं. शुक्ल को सागर छोड़ना पड़ा। इसके बाद वे रायपुर आए। बूढ़ापारा में उनका घर था, छत्तीसगढ़ की सियासी रणनीति इसी घर से बनने लगी।

भोपाल के मिंटो हॉल में रविशंकर शुक्ल मुख्यमंत्री पद की शपथ लेते हुए, देर रात शपथ ग्रहण की पुरानी तस्वीर।

भोपाल के मिंटो हॉल में रविशंकर शुक्ल मुख्यमंत्री पद की शपथ लेते हुए, देर रात शपथ ग्रहण की पुरानी तस्वीर।

अमावस्या की रात शपथ और दो महीने बाद निधन
दैनिक भास्कर को मध्यप्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार और लेखक विजय दत्त श्रीधर बताते था कि भोपाल के मिंटो हॉल (वर्तमान में नाम बदलकर कुशाभाऊ ठाकरे कन्वेंशन सेंटर) में 31 अक्टूबर 1956 की मध्यरात्रि में पहली सरकार का शपथ ग्रहण समारोह हुआ। उस वक्त अमावस्या की रात थी। शपथ ग्रहण समारोह चल रहा था, तभी किसी ने याद दिलाया कि ‘आज तो अमावस्या की रात है’। इसके बाद शपथ ले रहे शुक्ल पहले तो थोड़ा असहज हुए, फिर बोले ‘पर इस अंधेरे को मिटाने के लिए हजारों दीये तो जल रहे हैं’। वह शपथ वाली रात दीपावली की भी रात थी। 31 दिसम्‍बर 1956 को रविशंकर शुक्ल का निधन हो गया।

दिल्ली के बंगले में बाघ के साथ विद्याचरण शुक्ल की तस्वीर, ये बाघ विद्याचरण की कम्पनी के एक कर्मचारी को एक बार जंगल में भटका हुआ मिला था।

दिल्ली के बंगले में बाघ के साथ विद्याचरण शुक्ल की तस्वीर, ये बाघ विद्याचरण की कम्पनी के एक कर्मचारी को एक बार जंगल में भटका हुआ मिला था।

दिल्ली की सड़क पर बाघ के साथ निकलते थे विद्याचरण शुक्ल
अब बात विद्याचरण शुक्ल की। एक नेता जिसने दिल्ली वाले बंगले में बाघ पाल लिया। इसका नाम रखा गया जिमी। अनुभव बताते हैं कि दिल्ली के बंगले में जिमी सभी को पहचानता था, विद्याचरण के साथ खेलता था। लुटियंस इलाके में शाम को सड़क पर विद्याचरण बाघ को टहलाने निकलते थे। जब वो बड़ा हुआ तो आक्रामक भी हुआ, इसे दिल्ली के जू में छोड़ दिया गया।

इंदिरा बड़ी बहन, तीन अखबार पढ़ते थे
अनुभव ने बताया कि मैं कॉलेज में था तब सोशल मीडिया शुरू हो रहा था। विद्याचरण इसे लेकर जिज्ञासू रहा करते थे। उनके साथ में दो-दो घंटे हम बैठा करते थे और उन्हें मैं सोशल मीडिया के बारे में बताया करता था। वो तीन अखबार पढ़ते थे एक इंटरनेशल न्यूज, एक में नेशनल और तीसरे से लोकल खबरें पढ़कर अपडेट रहते थे। राजनीतिक समर्थक उन्हें विद्या भैया कहते थे।

इस ग्रामोफोन से म्यूजिक सुना करते थे विद्याचरण, रायपुर के बूढ़ापारा स्थित आवास की तस्वीर।

इस ग्रामोफोन से म्यूजिक सुना करते थे विद्याचरण, रायपुर के बूढ़ापारा स्थित आवास की तस्वीर।

विद्याचरण 7वीं क्लास तक ही स्कूल गए, इसके बाद कई साल बीमार रहने की वजह से घर पर पढ़ाई की। उस उम्र में वो रायपुर की पुरानी लायब्रेरी की किताबें पूरी पढ़ लिया करते थे। सामान्य ज्ञान में 100 में से 100 मिलते थे। उनके सिर का आकार जरा सा बड़ा था। परिवार में सब कहते थे कि ये तेज बुद्धी के हैं, उन्होंने राजनीतिक जीवन में इसे साबित किया। बचपन में दोस्तों के पैसे जमा कर प्राइवेट बैंक चलाया करते थे, ये जमा रकम किसी को जरुरत पड़ने या पिकनिक जाने पर खर्चते थे।

तस्वीर जब युवा नेता के रूप में दिल्ली पहुंचे थे विद्याचरण।

तस्वीर जब युवा नेता के रूप में दिल्ली पहुंचे थे विद्याचरण।

इंदिरा गांधी को विद्याचरण शुक्ला अपनी बहन बड़ी बहन के रूप में मानते थे। जब 1957 में वह पहली बार लोकसभा से सांसद बने थे। ट्रेनिंग के लिए इंदिरा गांधी से मिले। इसके बाद इंदिरा और उनके परिवार के करीबी रहे। संजय गांधी के सबसे अच्छे दोस्त माने जाते थे। वो पारिवारिक कार्यक्रमों में आते थे।

चमड़े वाले बर्तन में पी चाय
अनुभव बताते हैं पुराने समय में हमारे घर में किचन में किसी को जाने की इजाजत नहीं थी। बाहर का खाना खाने की इजाजत नहीं थी, रविशंकर ने स्वतंत्रता संग्राम के दौरान इस प्रथा को तोड़ा। जब विद्याचरण चुनाव कार्यक्रम के सिलसिले में महासमुंद इलाके में गए। चमड़े का काम करने वाले एक परिवार ने उसी बर्तन को साफ कर चाय बनाई और विद्याचरण को परोसी, उसी में विद्याचरण ने मजे से चाय पी।

यूनाइडेट नेशंस में भारत की ओर से भाषण देने वाले संभवत: इकलौते छत्तीसगढ़िया थे विद्याचरण।

यूनाइडेट नेशंस में भारत की ओर से भाषण देने वाले संभवत: इकलौते छत्तीसगढ़िया थे विद्याचरण।

बॉलीवुड सितारे इनके दफ्तर में लाइन लगाया करते थे
अब बात छत्तीसगढ़ की राजनीति के असल मायनों में दिग्गज और दिल्ली में किसी सुपर पॉवर नेता की जिंदगी बिता चुके विद्याचरण शुक्ल की। विद्याचरण के परपोते अनुभव बताते हैं कि जब वो सूचना प्रसारण मंत्री थे, उनके दफ्तर और दिल्ली वाले बंगले में देवानंद, अमिताभ बच्चन जैसे कलाकारों का आना जाना लगा रहता था।

एक बार इंदिरा गांधी के लिए परफॉर्म करने से इनकार पर रेडियो पर एक साल तक किशोर कुमार के गाने बैन कर दिए गए थे। कहा जाता है ये बैन विद्याचरण ने ही लगवाया था। अनुभव बताते हैं कि किशोर कुमार के इस किस्से के अलावा एक और बात थी कि विद्याचरण शुक्ल का किशोर कुमार के बड़े भाई अशोक कुमार से काफी दोस्ताना था।

विद्या चरण निजी जिंदगी में शाही ठाठ में रहा करते थे।

विद्या चरण निजी जिंदगी में शाही ठाठ में रहा करते थे।

कारों और बंदूकों का शौक, लगी थी गोली
वीसी शुक्ल के पास महंगी गाड़ियों का अच्छा कलेक्शन था, वे खुद अच्छे ड्राइवर थे और तेज रफ्तार गाड़ी चलाना उनका शौक था। नागपुर से पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने एलविन कूपर प्राइवेट लिमिटेड कंपनी शुरू की। इस दौरान लैंड रोवर डिस्कवरी-1 कार खरीदी। 60 के दशक में इसकी कीमत से 18 से 20 लाख रुपए के बीच थी।

दिल्ली में 7 रेसकोर्स रोड का जो बंगला अभी प्रधानमंत्री निवास है, बतौर कैबिनेट मंत्री बरसों तक वीसी का आशियाना रहा। 80 के दशक में करीब साढ़े छह एकड़ में आलीशान बंगला बनवाया गया। विद्याचरण शुक्ल के पास हथियारों का अच्छा कलेक्शन था।

दरअसल वीसी की कंपनी एलविन कूपर प्राइवेट लिमिटेड शिकार से जुड़ी थी, इसलिए उनके पास लाइसेंसी हथियार भी रहे। घर आने वाले मेहमानों को वे इन हथियारों को दिखाते और प्रत्येक की मारक क्षमता आदि के बारे में बताते थे। झीरम घाटी हमले में विद्याचरण को नक्सलियों की गोली लगी, आखिर वक्त में वो अपने घायल साथियों, सुरक्षाकर्मियों को पानी पिलाने, सुरक्षित रहने की बात कहते रहे।

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