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अरविंद नेताम का कांग्रेस ने किया सम्मान:गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू बोले- फिर भी कोई कमी है तो सीएम और प्रदेश अध्यक्ष से चर्चा कर हल निकालना चाहिए

बिलासपुर में प्रदेश के गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू ने आदिवासी नेता अरविंद नेताम को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि सरकार आने के बाद कांग्रेस ने उन्हें पूरा सम्मान दिया है। फिर भी उन्हें अगर किसी बात की कमी महसूस हुई है तो मुख्यमंत्री और प्रदेश अध्यक्ष से चर्चा कर हल निकालना चाहिए। उनका जो भी बयान आया है, उस पर मुझे कुछ नहीं कहना चाहिए।

गृहमंत्री और जिले के प्रभारी मंत्री ताम्रध्वज साहू बुधवार को विश्व आदिवासी दिवस पर आयोजित सम्मेलन के साथ ही जिले के अधिकारियों की बैठक लेने आए थे। इस दौरान मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि 9 अगस्त को पूरी दुनिया में विश्व आदिवासी मनाया जाता है। प्रदेश सरकार ने हर जिले में शासकीय तौर पर आदिवासी दिवस मनाने का निर्णय लिया है, जिस पर उन्हें बिलासपुर में शामिल होने का मौका मिला है। छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की सरकार बनने के बाद आदिवासियों के जनजीवन में बदलाव लाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में 44 फीसदी जंगल है, जहां आदिवासी निवासरत हैं। उन्हें संरक्षित करने उनका विकास करने का काम किया जा रहा है। आदिवासियों की 4 हजार 400 एकड़ जमीन लौटाया गया।

विश्व आदिवासीय दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में शामिल हुए गृहमंत्री।

विश्व आदिवासीय दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में शामिल हुए गृहमंत्री।

गृहमंत्री बोले- उनकी बात वो जाने, पर पूरा सम्मान दिया
आदिवासी नेता अरविंद नेताम की नाराजगी पर उन्होंने कहा कि सरकार बनने के बाद कांग्रेस ने उन्हें पूरा सम्मान दिया है। संगठन में उनकी भागादारी सुनिश्चित की गई है। उन्होंने ऐसा क्यों कहा, उनकी बात वो ही जाने। वो बहुत ही वरिष्ठ आदिवासी नेता है, उनके संबंध में मैं ज्यादा कुछ नहीं कह सकता।

सब्जी मंडी के लिए सड़क निर्माण कार्य का किया भूमि पूजन।

सब्जी मंडी के लिए सड़क निर्माण कार्य का किया भूमि पूजन।

आदिवासियों के विकास के लिए काम कर रही सरकार
गृहमंत्री साहू ने कहा कि कांग्रेस की सरकार बनने के बाद नक्सल क्षेत्र के 200 गांव को मुक्त कराया गया है। नक्सलियों के कारण 300 स्कूल बंद हो गए थे, जिसे शुरू कराया गया। इसी तरह लघु वनोपज का समर्थन मूल्य तय किया गया है। आदिवासियों को जमीन का पट्टा देने के साथ ही अबूझमाड़ जैसे इलाकों तक सरकार पहुंची है। जंगलों में स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी बेहतर काम किया गया है। ऐसी कई योजनाएं हैं, जो आदिवासियों के लिए संचालित किए जा रहे हैं।

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