Headlines

8 साल से फाइलों में अटका तेल्हा नाले का विकास:विपक्ष का आरोप-सफाई कार्य में लाखों का भ्रष्टाचार, सत्ता पक्ष ने कहा- साबित करो या माफी मांगो

निगम निगम की बुधवार को सामान्य सभा की बैठक हंगामेदार रही। 8 साल से फाइलों में बंद तेल्हा नाले का विकास और सफाई कार्य में भ्रष्टाचार का मुद्दा काफी गरमाया। विपक्ष ने सवाल किया कि 2015 में स्वीकृति के बाद अब तक तेल्हा नाले का काम शुरू क्यों नहीं हो पाया है। दूसरी बार ज्यादा रेट में टेंडर क्यों बुलाना पड़ा? इससे निगम को नुकसान हो रहा है।

उन्होंने यह भी सवाल किया कि एक साल पहले रिटेंडर हो चुका है, फिर भी अब तक वर्क ऑर्डर जारी नहीं किया गया। विपक्ष के सवालों का जवाब देते हुए सत्ता पक्ष की ओर से कहा गया कि नाले के विकास की प्रक्रिया जारी है। रिटेंडर में सिर्फ एक ही आवेदन आया है, रेट ज्यादा है, इसलिए सामान्य सभा में सहमति के लिए यह प्रस्ताव लाया गया है। विपक्ष यदि नाले का विकास नहीं चाहता है तो टेंडर निरस्त कर देते हैं।

इधर, सफाई के मुद्दे पर भी विपक्ष ने सत्ता पक्ष को घेरने का प्रयास किया। पार्षद महेश वर्मा ने सफाई कार्य में लाखों रुपए का भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए सूचना के अधिकार के तहत लाए कुछ दस्तावेज भी दिखाने का प्रयास किया, लेकिन चर्चा नहीं हो सकी। इसके बाद हंगामा और तेज हो गया। स्वास्थ्य प्रभारी लक्ष्मीपति राजू ने कहा कि सत्ता सरकार पर झूठा आरोप लगाया जा रहा है।

विपक्ष भ्रष्टाचार साबित करे और कोर्ट जाए। सत्ता पक्ष के पार्षदों ने सदन में महेश वर्मा से माफी मांगने की बात की। इसी को लेकर करीब आधा घंटे तक हंगामा होता रहा। इस बीच सत्ता पक्ष ने बहुमत के आधार पर बिना चर्चा के कई प्रस्ताव पास कर दिए। सुबह 11 बजे शुरू हुई सामान्य सभा 12.50 को समाप्त कर दी गई।

जानिए आखिर क्या है तेल्हा नाला का पूरा मामला

तेल्हा नाला खुर्सीपार से शुरू होकर नंदि​नी रोड, संतोषी पारा, मिलन चौक सहित आसपास के चार वार्डों से होते हुए सूर्या​ विहार स्मृतिनगर के पास कोसानाला में मिलता है। इस दौरान नाला करीब 15 से 18 किलोमीटर है। बारिश के दिनों में नाला उफान में होने से आसपास के क्षेत्रों में डूबान की स्थिति बनती है। इसके अलावा कब्जे की चपेट में है। इसे देखते हुए निगम ने 1 जनवरी 2015 को इसमें लाइनिंग और केनाल रोड की तर्ज पर इसका विकास किया जाना तय किया गया। 2.49 करोड़ की कार्ययोजना बनी।

स्वीकृति ली गई। 28 जनवरी 2015 को निविदा की अनुमति ली गई। 8 कार्य एजेंसी ने टेंडर प्रक्रिया में भाग लिया। ​इसके बाद जिसे काम मिला, उसने काम से इंकार कर दिया। खबर है कि नाला के ले आउट और सीमांकन तक नहीं कराया जा सका, जिसकी वजह से यह स्थिति​ बनी। 24 जून 2022 को वह टेंडर निरस्त कर दिया गया। 8 जुलाई 2022 को पुन: टेंडर निकाला गया। इस बार लागत 2.61 करोड़ बताई गई। 4.89 में एबो में सच्चिदानंद पांडेय ने टेंडर भरा। उसके अलावा किसी ने निविदा नहीं भरी। इसका प्रस्ताव महापौर की परिषद में बुधवार को लाया, जिस पर विपक्ष ने आपत्ति की।

इन प्रस्तावों को बहुमत के आधार पर पारित कर दिया गया

करीब 2 घंटे चली सभा में ​बहुमत के आधार पर सारे प्रस्ताव पारित कर दिए गए। वार्ड 37 संत रविदास नगर स्थित उद्यान का नामकरण पूर्व प्रधानमंत्री स्व. अटल बिहारी बाजपेयी के नाम पर रखा जाएगा। वार्ड 25 संतोषीपारा तेल्हा नाला (करूणा अस्पताल से गौरव पथ)तक विकास कार्य किया। शहर में 500 सीट, शहरी महिला आजीविका केन्द्र बनाया जाएगा। जाति- मूल निवास की उद्घोषणा,नगरपालिक निगम, भिलाई का नया “लोगो – मोनो” जारी किया गया।

विश्व स्तरीय सेंट्रल लाइब्रेरी सह रीडिंग जोन बनाया जाएगा। साडा भिलाई के समय आबंटित (व्यवस्थापित) प्रकरण जिसमें ऑफर की पूर्ण राशि जमा हो चुकी है किन्तु पंजीयन नहीं हुआ। नगर पालिका निगम भिलाई के गठन पश्चात निगम द्वारा विभिन्न आवासीय आवास सह व्यवसायिक एवं व्यवसायिक योजनाओं में आबंटित 300 भूखंडों पर विचार किया जाएगा। विभिन्न क्षेत्रों (योजनाओं) में रिक्त आवासीय, व्यावसायिक, आवास सह व्यवसायिक भूखंडों के अंतरण का विषय सामान्य सभा में रखा गया था।

विपक्ष चर्चा करना नहीं चाहती

हम सभी विषयों पर सार्थक चर्चा कर रहे थे, लेकिन विपक्ष खुद चर्चा नहीं करना चाहता। झूठा आरोप लगाकर मुद्दे से हटकर बात करते हैं। उन्हें शहर के विकास से कोई लेना देना नहीं है, लेकिन हमें तो काम करना है। इसलिए बहुत मत के आधार पर प्रस्ताव पारित किए गए।
-नीरज पाल, मेयर नगर निगम भिलाई

धारा 302 के तहत अपराध दर्ज हो

एक बच्ची की मौत हुई, इसमें जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। दोषी अधिकारी कर्मचारी को सामने लाना जरूरी है। उनके खिलाफ 302 के तहत अपराध दर्ज होना चाहिए। मैंने सदन में खुद भी दोषी बताया क्योंकि हम सब सदन में स्वीकृति देने वाले दोषी हैं।
-वशिष्ठ नारायण मिश्रा, निर्दलीय पार्षद

राजस्व विभाग में कार्रवाई का हमें अधिकार नहीं

तेल्हा नाला मामले में प्रथम दृष्टया देखा जाए तो राजस्व विभाग की गलती है। क्योंकि उन्होंने पिछले ठेकेदार को लेआउट ही नहीं दिया। राजस्व विभाग के खिलाफ हमें कार्रवाई का अधिकार नहीं है। कलेक्टर को अवगत कराया जाएगा। इसके आधार पर जांच भी होगी।

-रोहित व्यास, आयुक्त नगर निगम भिलाई

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *