‘नक्सलियों ने हर घर से मांगा एक आदमी’:सरेंडर्ड नक्सली का दावा- अंदरूनी इलाकों में घुसकर मार रही फोर्स, इसलिए डरकर छोड़ रहे संगठन

पुलिस के सामने सरेंडर कर चुके नक्सलियों ने दैनिक भास्कर से बातचीत के दौरान बड़े खुलासे किए हैं। दावा है कि छत्तीसगढ़ के बस्तर में नक्सलियों की कमर अब टूटने लगी है। अंदरूनी इलाकों में पुलिस की पैठ बढ़ रही है। जवान नक्सलियों को मार रहे हैं। इसके चलते उनमें घबराहट है। प्लाटून, कंपनी और बटालियन में उनके लड़ाकों की संख्या कम हो रही है। खुद को कमजोर होता देख नक्सली लीडरों ने फरमान जारी किया है कि हर गांव के हर एक घर से एक लड़का या लड़की संगठन में भर्ती हो।

विकास, सुजाता जैसे बड़े हार्डकोर नक्सलियों के साथ काम कर चुके उनके साथियों का कहना है कि, हालांकि युवा जाना नहीं चाह रहे। जो जा रहा है वह पांच से छह महीने में फिर से भागकर आ रहा है। यह सिलसिला पिछले डेढ़ से दो सालों से चल रहा है। यह बात बाहर नहीं आ पाई। नक्सलियों के कई लीडर कोरोना और अन्य बीमारियों से मर गए हैं। कइयों ने संगठन छोड़ दिया तो कुछ को पुलिस ने मार गिराया है।संगठन कमजोर हो रहा है।

सरेंडर नक्सलियों ने दैनिक भास्कर के कैमरे के सामने खुलासा किया है। इनका गांव आना -जाना लगा रहता है। इसलिए हमने इनके फेस को ब्लर कर दिया है।

सरेंडर नक्सलियों ने दैनिक भास्कर के कैमरे के सामने खुलासा किया है। इनका गांव आना -जाना लगा रहता है। इसलिए हमने इनके फेस को ब्लर कर दिया है।

फोर्स अंदर घुस रही, एनकाउंटर का है भय
सरेंडर्ड नक्सलियों के मुताबिक, जिन इलाकों में पहले माओवादियों का जमावड़ा रहता था। वहां फोर्स का आना संभव नहीं था। अब ऐसे इलाकों में भी पुलिस फोर्स अंदर घुसने लगी है। एनकाउंटर का भय है। कोई मरना नहीं चाहता। फोर्स की पैठ बढ़ रही है, इसलिए नक्सली उन इलाकों को खाली कर रहे हैं। हालांकि, गांव वालों के बीच उनके सोर्स जरूर हैं।

संख्या कम हो रही लेकिन, ताकत बहुत है
नक्सलियों की संख्या कम जरूर हो रही है। लेकिन, उनके पास फाइटर्स अच्छे हैं। ताकत बहुत है। नक्सलियों की प्लाटून में पहले जहां 30 से 35 नक्सली हुआ करते थे अब संख्या सिमट कर 15 हो गई है। एक कंपनी में 100 की संख्या थी अब 70 नक्सली हैं। इसी तरह बटालियन में पहले 300 नक्सली थे लेकिन अब सिर्फ 150 लड़ाके ही हैं। इनकी LGS खत्म हो चुकी है। DVCM, ACM जैसे कैडर के नक्सली संगठन छोड़ रहे हैं।

अक्की राजू की मौत हो गई है।

अक्की राजू की मौत हो गई है।

पिछले 2 सालों में इन बड़े लीडर्स की हुई मौत

राजी रेड्डी – नक्सलियों के केंद्रीय कमेटी का सदस्य और खूंखार नक्सली कमांडर था। किसी गंभीर बीमारी के चलते इसकी मौत हो गई है। एक दिन पहले वीडियो भी सामने आया था। छत्तीसगढ़-आंध्र-तेलंगाना बॉर्डर के जंगलों में दम तोड़ दिया है। इसपर करीब 60 लाख रुपए का इनाम घोषित था।

अक्की राजू – यह भी नक्सलियों के सेंट्रल कमेटी का सदस्य था। इसपर करीब 50 लाख रुपए का इनाम घोषित था। लंबे समय से बीमार चल रहा था। नक्सलियों की मेडिकल टीम इसका इलाज कर रही थी। हालांकि, जंगल में ही इसकी मौत हो गई थी।

हरिभूषण – यह नक्सलियों के केंद्रीय कमेटी का सदस्य था। इसपर 40 लाख रुपए से ज्यादा का इनाम घोषित था। छ्त्तीसगढ़, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना जैसे राज्यों में सक्रिय था। 21 जून को कोरोना समेत अन्य बीमारियों की वजह से इसकी मौत हो गई।

कट्टी मोहन राव उर्फ दामू दादा – नक्सलियों के टॉप लीडर्स में से एक था। इसपर लाखों रुपए का इनाम भी घोषित था। लंबे समय से शुगर, बीपी और कोरोना जैसी बीमारियों से जूझ रहा था। 10 जून 2021 को इसकी मौत हो गई।

विनोद – यह दरभा डिवीजन के हार्डकोर नक्सलियों में से एक था। इसपर करीब 15 लाख रुपए से ज्यादा का इनाम घोषित था। बीमारी की वजह से इसकी भी मौत हो गई।

इनकी भी मौत- देवे, रूपी, गंगा, सुदरु, मुन्नी, रीना सहित अन्य नक्सलियों की भी मौत हो चुकी है।

बस्तर के जंगल में नक्सलियों ने शहीदी सप्ताह मनाया था।

बस्तर के जंगल में नक्सलियों ने शहीदी सप्ताह मनाया था।

मजबूत कर रहे संगठन, सलवा जुडूम से पहले थी ऐसी स्थिति
हर घर से एक लड़का या फिर लड़की को संगठन में शामिल करने का नक्सलियों का यह फरमान सलवा जुडूम से पहले काफी ज्यादा था। उस समय भी नक्सली बस्तर में हर गांव के हर घर से युवक-युवतियों को संगठन में भर्ती होने को कहते थे। 10 से लेकर 13 साल तक के बच्चों को जबरदस्ती घर से उठाकर ले जाते थे। उस समय बस्तर में नक्सलवाद काफी तेजी से बढ़ा था।

उनके लाल लड़ाकों की संख्या भी काफी अधिक थी। कई बड़े नक्सली हमले भी हुए थे। अब करीब 15 से 20 सालों के बाद हर घर से एक युवा को संगठन में भर्ती होने का फरमान जारी किए हैं। हालांकि, युवा नक्सल संगठन में नहीं बल्कि फोर्स में जाना चाह रहे हैं। बस्तर फाइटर्स और बस्तरिया बटालियन के गठन के समय 50 हजार से ज्यादा युवाओं के आवेदन पुलिस को मिले थे। इनमें से कई नक्सलगढ़ के युवा थे।

लोन वर्राटू अभियान का मिला फायदा
एनकाउंटर और गिरफ्तारी के अलावा पुलिस के लोन वर्राटू यानी घर वापस आइए अभियान और पूना नर्कोम जैसे अभियान का भी काफी प्रभाव पड़ा है। दंतेवाड़ा और सुकमा पुलिस के इस अभियान से प्रभावित होकर नक्सली संगठन छोड़ रहे हैं। संगठन छोड़ने के बाद इन अभियानों के तहत नौकरी लग रही। जो खेती करना चाहते हैं उन्हें ट्रैक्टर दे रहे हैं।

राशन कार्ड, आधार कार्ड, पेन और वोटर आईडी कार्ड बनाए जा रहे हैं। सरकार की योजना अंदर तक पहुंच रही है। इसलिए अब जंगल-जंगल कोई घूमना नहीं चाहता। नक्सलियों की कमर टूटने की सबसे बड़ी वजह घर वापस आइए अभियान भी है।

नक्सलियों ने तस्वीर जारी कर दिखाई ताकत
साल 2022 और 2023 में नक्सलियों ने बस्तर के जंगल में शहीदी सप्ताह मनाया था। इन दोनों सालों में हार्डकोर नक्सलियों समेत सैकड़ों हथियारबंद नक्सली शामिल हुए थे। आयोजन के बाद नक्सलियों ने तस्वीर जारी की थी और अपनी ताकत दिखाई थी। तस्वीरों के माध्यम से बताया था कि हम कमजोर नहीं हैं। दंतेवाड़ा के अरनपुर में IED ब्लास्ट कर 10 जवानों और एक चालक की हत्या कर अपनी उपस्थिति दर्ज करवाई थी।

जगदलपुर प्रवास पर रहे मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा था नक्सलवाद समाप्ति की ओर है।

जगदलपुर प्रवास पर रहे मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा था नक्सलवाद समाप्ति की ओर है।

IG बोले- दुश्मन को कमजोर समझना ठीक नहीं

बस्तर के IG सुंदरराज पी ने दैनिक भास्कर से बातचीत में कहा कि नक्सलियों की तरफ से फरमान जारी करना यह एक अफवाह भी हो सकती है। गांव-गांव में पुलिस की पैठ काफी हद तक बढ़ी है। पिछले कुछ सालों में 54 कैंप खोले हैं। जिससे नक्सली बैकफुट हुए हैं। हालांकि, नक्सली पूरी तरह से कमजोर हुए हैं यह हम नहीं कह सकते। दुश्मन को कमजोर समझना ठीक नहीं। फोर्स का प्रभाव नक्सल संगठन में जरूर पड़ा है।

CM ने कहा – समाप्ति की ओर है नक्सलवाद
जगदलपुर प्रवास पर रहे मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा था कि, बस्तर में नक्सलवाद अब समाप्ति की ओर है। सरकार के किए कामों का फायदा मिल रहा है। अंदरूनी इलाके के युवा अब संगठन में शामिल होना नहीं चाहते हैं। बल्कि मुख्यधारा से जुड़कर नौकरी करना चाहते हैं। हमने कई युवाओं को नौकरी दी है। गांव-गांव तक विकास पहुंचाया है। यही वजह है कि अब नक्सली बैकफुट हो चुके हैं।

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