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प्रबंधन ने की प्लानिंग:बीएसपी ने कहा- सेक्टर 1 हॉस्पिटल शासन को नहीं सौंपेंगे, राजहरा के अस्पताल को आउट सोर्सिंग पर देने की तैयारी

बीएसपी प्रबंधन ने सेक्टर 9 अस्पताल के बाद अब सेक्टर 1 अस्पताल को भी राज्य को सौंपे जाने से इंकार कर दिया है। वहीं दल्ली राजहरा अस्पताल में कर्मियों को बेहतर चिकित्सा सुविधा मुहैया कराने के लिए आउट सोर्स पर दिए जाने की तैयारी में है। राज्य शासन ने पहले सेक्टर 9 अस्पताल को टेक ओवर लेने की इच्छा जाहिर की थी।

उस वक्त बीएसपी प्रबंधन को जानकारी दी गई थी कि परिसर में मेडिकल कालेज भी शुरू किया जाएगा। इससे अस्पताल में चिकित्सकों की कमी दूर हो जाएगी। इससे सामान्य मरीजों के साथ-साथ बीएसपी कार्मिकों और उनके परिजन को बेहतर इलाज की सुविधा उपलब्ध हो जाएगी।

लेकिन प्रबंधन ने इस प्रस्ताव को हरी झंडी नहीं दी। सेक्टर 1 अस्पताल को आधिपत्य में लेने के लिए शासन की ओर से पहल की गई थी। चिकित्सकों के रिटायर होने और नए चिकित्सकों के नहीं आने से यह प्राइमरी हेल्थ सेंटर की केटेगरी में आ गया है। सूत्रों के मुताबिक प्रबंधन ने इसे भी देने से इंकार कर दिया है।

संविदा चिकित्सकों के भरोसे सेक्टर 1 अस्पताल

सेक्टर 1 अस्पताल में पहले ऑपरेशन थिएटर से लेकर कैंसर यूनिट तक संचालित हो रहे थे। ऑपरेशन थिएटर तो पहले ही बंद हो चुका है। कैंसर यूनिट भी बंद होने की कगार में है। अस्पताल में ओपीडी की सुविधा है। वह भी संविदा चिकित्सकों के भरोसे संचालित हो रहा है। स्थिति ठीक करने के लिए प्रबंधन ने महीने भर पहले सेक्टर 9 अस्पताल से गायनिक और आंख के एक्सपर्ट चिकित्सक को भेजना शुरू किया है। जबकि यह अस्पताल टाउनशिप के चार-पांच सेक्टर के साथ-साथ कैंप और खुर्सीपार एरिया को कवर करता है।

घोषणा के तीन महीने बाद भी योजना लागू नहीं

दल्ली राजहरा में कार्मिकों से अधिक ठेका श्रमिक कार्यरत हैं। बीएसपी प्रबंधन तीन महीने पहले इनके परिजन को भी नियमित कार्मिकों की तरह अपने अस्पताल में मुफ्त में इलाज कराने की सुविधा उपलब्ध कराने की घोषणा कर चुका है लेकिन इसे अब तक लागू नहीं किया जा सका है। क्योंकि अस्पताल में जनरल चेकअप के अलावा आपरेशन और एक्सरे जैसी बुनियादी सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं है। इलाज के लिए बाहर भेजे जाने पर अपोलो कितना चार्ज करेगा, यह तय नहीं हो पाया है।

अपोलो ने मांगा राजहरा का अस्पताल, चल रही तैयारी

बीएसपी के दल्ली राजहरा अस्पताल में भी चिकित्सकों की भारी कमी है। एक समय यहां 16 नियमित डाक्टर्स कार्यरत थे। वहीं में केवल 4 नियमित डाक्टर रह गए हैं। 4 अन्य चिकित्सक कांट्रैक्ट पर काम कर रहे हैं। वे भी जनरल फिजीशियन ही है। अपोलो अस्पताल प्रबंधन ने इस अस्पताल को आउट सोर्स पर लेने का प्रस्ताव दिया है। जिसके बाद बीएसपी में स्वास्थ विभाग के वरिष्ठ अफसरों के साथ अपोलो प्रबंधन के प्रतिनिधियों ने अस्पताल का दौरा भी कर लिया है। चार्जेस को लेकर मंथन चल रहा है।

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