लाइसेंस देने में चल रही है मनमानी:बिना दस्तावेज सीएमएचओ के बेटे की पैथोलॉजी को 2 दिन में मिला लाइसेंस

जिले में अस्पताल, क्लीनिक और पैथोलॉजी सेंटरों को लाइसेंस देने में मनमानी चल रही है। हेल्थ विभाग के अफसर बिना फायर एनओसी और एसएमएस एग्रीमेंट अपने खास के हेल्थ सेंटरों की ही फाइल कलेक्टर के यहां भेजकर लाइसेंस जारी करवा रहे हैं। जबकि फायर एनओसी, एसएमएस एग्रीमेंट, पर्यावरण एनओसी रहने के बाद भी आम लोगों की फाइलें साल दर साल सीएमएचओ के यहां इकट्‌ठा हो रही हैं।

इसका खुलासा 20 मई 2023 को सीएमएचओ डॉ. जेपी मेश्राम के बेटे अनुज मेश्राम की कीर्ति पैथालॉजी लैब, दुर्ग को दिए गए लाइसेंस से हो रहा है। लाइसेंस के आवेदन में 16 जनवरी 2020 को एक साल के लिए दी गई फायर एनओसी और बायोमेडिकल वेस्ट निस्तारण के लिए एसएमएस से एग्रीमेंट के अमान्य दस्तावेज लगाए गए हैं। फिर भी अनुज मेश्राम के पैथालॉजी की फाइल कलेक्टर के यहां भेजकर 19 मई 2028 तक के लिए लाइसेंस जारी करा दिया गया है।

इसके विपरीत ज्यादा सुविधा वाली 55 पैथालॉजी व डाइग्नोस्टिक सेंटर और 19 अस्पतालों को सभी दस्तावेज रखने के बाद भी औसतन पांच साल से लाइसेंस नहीं दिया गया है। हर साल सबके संचालक एक साल के लिए मान्य रहने वाली फायर एनओसी, एसएमएस ​एग्रिमेंट, पर्यावरण एनओसी आदि नए सिरे से बनवाकर लाइसेंस के लिए आवेदन कर रहे हैं। लाइसेंस जारी करना तो दूर की बात यह साल भी बीत गया, उनके यहां कोई इंस्पेक्शन तक करने नहीं पहुंचा है। आवेदक भटक रहे हैं।

जानिए, नर्सिंग होम एक्ट के तहत लाइसेंस जारी करने की पूरी प्रक्रिया

2013 से प्रदेश में नर्सिंग होम एक्ट लागू हैं। तब से क्लीनिक, पैथालॉजी, अस्पताल को लाइसेंस लेना ​अनिवार्य है। कलेक्टर के हस्ताक्षर से नर्सिंग होम एक्ट का लाइसेंस जारी होता है। इसके लिए आवेदक को मुख्यत: गुमास्ता लाइसेंस, फायर एनओसी, पर्यावरण एनओसी, बायोमे​डिकल वेस्ट निस्तारण का एसएमएस संस्था से एग्रीमेंट सहित कई अन्य एग्रीमेंट पेपर लगाकर, ऑनलाइन आवेदन करना है। फिर सीएमएचओ की टीम को मौके पर पहुंचकर सभी दस्तावेजों की वास्तविकता जांचती है।

संलग्न दस्तावेजों और ग्राउंड की स्थिति समान होने पर टीम अपनी रिपोर्ट सीएमएचओ को देती है। इसके आगे सीएमएचओ अपनी ​टिप्पणी सहित लाइसेंस की फाइल जिला पर्यवेक्षीय प्राधिकारी/कलेक्टर के यहां पेश करते हैं। कलेक्टर चाहे तो रि-इंक्वायरी करा सकता है, लेकिन फाइल नीचे से ऊपर पहुंचने के चलते वह हस्ताक्षर कर देते हैं।

पैथालॉजी में जो डॉक्टर पदस्थ है उसका छत्तीसगढ़ में पंजीयन ही नहीं

सीएमएचओ के बेटे की पैथालॉजी में पैथॉलोजिस्ट के तौर पर डॉ. राजकुमार दामले पदस्थ हैं। विभाग के रिकार्ड के अनुसार उनका छत्तीसगढ़ मेडिकल काउंसिल में पंजीयन ही नहीं है। डायरेक्टर हेल्थ के निर्देशों की माने तो ​यहां की काउंसिल में पंजीयन के ​बिना बाहर का डॉक्टर प्रदेश की सीमा में मरीज तक नहीं देख सकता है। डॉ. दामले का मध्यप्रदेश की काउंसिल में पंजीयन (4852) है।

वेटिंग रूम के नाम पर बाहर दो तीन कुर्सियां, पानी की सुविधा तक नहीं

कीर्ति पैथालॉजी लैब, प्रियंका कॉम्प्लेक्स के शाप नंबर-6 में सं​चालित है। लाइसेंस में इस पैथालॉजी को बड़ी श्रेणी की पैथॉलाजी बताया गया है। इसके अनुसार यहां जांच कराने वालों के लिए पानी की सुविधा युक्त वेटिंग रूम होना चाहिए, लेकिन यहां कोई वेटिंग रूम नहीं है। जांच कराने वालाें को पैथालॉजी के बाहर प्लास्टिक की चेयर पर बैठना पड़ रहा है।

इन अस्पतालों के आवेदन और दस्तावेज दोनों संलग्न है, लेकिन लाइसेंस जारी नहीं हुए

सांई कृपा हॉस्पिटल, कर्मा हॉस्पिटल, मितान हॉस्पिटल, जस डे केयर हॉस्पिटल, नंदनी नर्सिंग होम, आरोग्य क्लीनिक एंड हॉस्पिटल, सिटी केयर हॉस्पिटल, सांई नमन हॉस्पिटल, भिलाई 3, जेआरडी निलीमा हॉस्पिटल, गंगोत्री हॉस्पिटल एंड डायग्नोस्टिक सेंटर, श्री सांई मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल, गिंदौड़ी देवी मेमोरियल, श्री विनायक नर्सिंग होम, सांई ज्योति हॉस्पिटल, लक्ष्मी नाराण मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल।जिन्हें लाइसेंस नहीं मिल रहा।)

सीधी बात

डॉ. जेपी मेश्राम, सीएमएचओ, दुर्ग

मेरे पास जिसकी फाइल आती है, उसे कलेक्टर को भेजता हूं

18 अस्पताल, 55 पैथॉलाजी के पास लाइसेंस के लिए सभी दस्तावेज ​फिर भी लाइसेंस नहीं दिया, क्यों?
– लाइसेंस के लिए मेरे पास जिसकी भी फाइल आती है, मैं कलेक्टर के पास भेज देता हूं। फाइल नहीं रोकता।

अपने बेटे के पैथॉलाजी की फाइल आपके पास पहुंच जाती है, बिना दस्तावेज लाइंसेस जारी हो जाता है, कैसे?
– अरे, ऐसा नहीं है। वह तो डाॅ. राजकुमार दामले की पैथालॉजी है। सभी जरूरी दस्तावेज हैं। डॉ. दामले उसे चला रहे हैं।

आपके बेटे का नाम अनुज मेश्राम है न, दुर्ग की ​कीर्ति पैथालॉजी उन्हीं की है। डॉ. दामले वहां बतौर डॉक्टर हैं?
– कीर्ति पैथालॉजी को मई 2023 में लाइसेंस जारी है। अनुज मेश्राम मेरे बेटे ही हैं। मेरी जानकारी म​ें लाइसेंस के जरूरी दस्तावेज हैं।

नर्सिंग होम एक्ट के अनुपालन की जिम्मेदारी आपको दी गई है, आप ही नियमों का पालन नहीं कर रहे हैं?
– चूक कहां से हुई, मैं इसे चेक करवाता हूं। मुझे तो पता नहीं कि कितनों को लाइसेंस नहीं जारी है।

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