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हादसों पर नहीं लगा अंकुश:हादसे रोकने दो साल में 25 करोड़ खर्च फिर भी बीएसपी में नहीं थम रही दुर्घटनाएं

बीएसपी ने प्लांट परिसर में हादसों पर अंकुश लगाने के लिए एजेंसी हायर की, जिसका 25 करोड़ भुगतान भी किया। बावजूद हादसों पर अंकुश नहीं लगा है। बीते दो साल में ही गैलरी और स्ट्रक्चर के गिरने के पांच हादसे हो चुके हैं। जिसमें उत्पादन के प्रभावित होने से प्रबंधन को करोड़ों का नुकसान उठाना पड़ा। इन सबके बाद भी उस एजेंसी को एक और साल के लिए एक्सटेंशन दे दिया गया है।

बीएसपी में गैस सप्लाई लाइन में आग पकड़ने से दमकल कर्मियों सहित 14 लोगों की मौत हो गई थी, जिसमें अधिकारी भी शामिल थे। इसके बाद प्लांट में बिना एसओपी का पालन काम कराए जाने को लेकर बवाल उठा तब प्रबंधन ने एक एजेंसी की नियुक्ति की।

एजेंसी को जिम्मेदारी दी गई थी कि वह कार्यस्थल में सुरक्षित तरीके से काम करने का प्रशिक्षण कर्मियों को दे। साथ ही मशीनों के साथ-साथ दुर्घटनाजन्य स्थानों का पता कर प्रबंधन को इसकी जानकारी दे ताकि समय के पहले कार्रवाई कर समस्या का निराकरण कर सके। लेकिन दल्ली के क्रशिंग और वाशिंग प्लांट में हुए हादसे से एक बार भी सुरक्षा को लेकर अब तक के उठाए गए कदमों पर सवाल उठने लगे हैं।

स्ट्रैब्लिटी चेक करने वालों के पास उपकरण ही नहीं

बताया गया कि प्लांट में गैलरी और स्ट्रक्चर की स्टेबिलिटी को चेक करने का मापदंड है। इसके लिए 8-10 अधिकृत एजेंसी भी नियुक्त है। लेकिन उनके पास ऐसा कोई उपकरण ही नहीं होता जिससे स्टेबिलिटी को चेक किया जा सके। यानि इस काम में भी खानापूर्ति ही की जा रही है। इतना ही नहीं प्रत्येक हादसे के बाद उसका आडिट किया जाता है। ताकि दोबारा इस तरह की घटना न हो लेकिन हर दो-चार महीने में एक ही तरह की घटनाएं आडिट करने के तरीके पर सवाल उठा रही है।

दो साल में यहां भी लगातार गैलरी और स्ट्रक्चर गिरे

दल्ली प्लांट की घटना के पहले दो साल में गैलरी और स्ट्रक्चर के गिरने की चार और घटनाएं हो चुकी है। इनमें बीते सप्ताह एसपी 2 की घटना भी शामिल है। यहां स्ट्रक्चर ही बेंड हो गया। पिछले सितंबर में ओएचपी के आरएम की गैलरी भरभराकर गिर गई थी। पिछले साल ही कोक ओवन में भी गैलरी गिरने की घटना हो चुकी है। दो साल पहले एसपी 3 में गैलरी गिरने की घटना हुई थी। यानि बीएसपी में गैलरी और स्ट्रक्चर गिरने की घटना लगातार हो रही है।

उत्पादन के दबाव में मेंटेनेंस कार्य को नजरअंदाज कर रहे

दल्ली के क्रशिंग एवं वाशिंग प्लांट में स्ट्रक्चर के ढहने से साफ हो गया है कि स्ट्रक्चर पुराना होने की वजह से सड़ चुका था। उस पर ध्यान दिया जाता तो हादसा होने के पहले उसे बदलने का निर्णय लिया जा सकता था। लेकिन इसके लिए प्रबंधन को कैपिटल रिपेयर में लेना पड़ता और प्लांट का कामकाज ठप हो जाता। लिहाजा प्रबंधन ने जर्जर स्ट्रक्चर का इस्तेमाल जारी रखा और गुरुवार को वह भरभराकर पूरी तरह ढह गया। जिससे क्रशिंग और वाशिंग प्लांट में काम पूरी तरह बंद हो गया।

जानिए…..लगातार हो रहे हादसों की प्रमुख वजह

उत्पादन के दबाव की वजह से मेंटेनेंस को नजरअंदाज तो किया जा रहा है। समय-समय पर साफ-सफाई भी नहीं की जाती। इस वजह से डस्ट स्ट्रक्चर पर जमा होने लगते हैं और समय के पहले सड़ जाते हैं। इतना ही नहीं गैलरी पर डिजाइन से भी अधिक लोड में इस्तेमाल किया जा रहा है। जिसके कारण भी स्ट्रक्चर बेंड और गिर रहे हैं। इसके अलावा पुराने स्किल्ड कर्मी रिटायर होने के बाद इन्हें आपरेट करने का काम आउट सोर्स पर दे दिया जाता है। ठेकेदार अकुशल श्रमिकों को रखकर उनसे काम ले रहा है। प्रॉपर हैंडलिंग नहीं होने से भी गैलरी और स्ट्रक्चर कमजोर हो रहे हैं। इस वजह से काम के दौरान हादसे हो रहे हैं।

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