Automobile Companies Needs to Include Six Airbags in Cars to Get Five-Star Rating in Bharat NCAP

Bharat NCAP में फाइव-स्टार रेटिंग के लिए कारों में 6 एयरबैग होना जरूरी

पिछले कुछ वर्षों में ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री के लिए केंद्र सरकार ने सिक्योरिटी से जुड़े स्टैंडर्ड्स को बढ़ाया है। इसकी कड़ी में हाल ही में भारत NCAP को लॉन्च किया गया था। रोड ट्रांसपोर्ट एंड हाइवेज मिनिस्टर Nitin Gadkari ने बुधवार को कहा कि नए क्रैश टेस्ट रूल्स से ऑटोमोबाइल कंपनियों के लिए कारों में छह एयरबैग देना जरूरी हो जाएगा। अमेरिका, जापान, चीन और दक्षिण कोरिया के बाद भारत इस तरह का प्रोग्राम शुरू करने वाला पांचवां देश है। इसका लक्ष्य कारों की सेफ्टी बढ़ाना है। 

पिछले वर्ष गडकरी ने बताया था कि कारों के लिए छह एयरबैग को जरूरी करने का नियम इस वर्ष अक्टूबर से लागू होगा। उन्होंने ऑटोमोटिव कंपोनेंट मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (ACMA) के एक कार्यक्रम के दौरान कहा, “हमने भारत NCAP को लॉन्च किया है। इसमें कारों के लिए 5-स्टार सेफ्टी रेटिंग केवल छह एयरबैग होने पर ही मिलेगी। लोग अब सतर्क हो गए हैं और जिन कारों में छह एयरबैग होंगे उन्हें खरीदने में अधिक दिलचस्पी हो सकती है। यह कार मैन्युफैक्चरर्स और लोगों को फैसला करना है।” देश में सभी कारों में कम से कम दो एयरबैग उपलब्ध कराने का नियम है। 

पिछले वर्ष सरकार ने अनुमान लगाया था कि चार एयरबैग और देने पर ऑटोमोबाइल कंपनियों की कॉस्ट 6,000 रुपये से कुछ अधिक होगी। हालांकि, मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह कॉस्ट लगभग 19,000 रुपये की हो सकती है। भारत  NCAP से कारों की सेफ्टी बढ़ेगी और एक्सपोर्ट किए जाने वाले व्हीकल्स की बेहतर क्वालिटी को सुनिश्चित किया जा सकेगा। इसके तहत कारों की विभिन्न तरीकों से टेस्टिंग की जाएगी। ये तरीके Global NCAP के अनुसार हैं। टेस्टिंग के बाद कारों को सेफ्टी रेटिंग मिलेगी। देश की सबसे बड़ी कार मेकर Maruti Suzuki के एग्जिक्यूटिव ऑफिसर (कॉरपोरेट अफेयर्स), Rahul Bharti ने कहा था कि कंपनी केंद्र सरकार की इस पहल का स्वागत करती है और पहले लॉट में मारूति के कम से कम तीन मॉडल्स को टेस्टिंग के लिए भेजा जाएगा। 

इसके तहत 3.5 टन के मोटर व्हीकल्स के लिए सेफ्टी स्टैंडर्ड्स को बढ़ाया जाएगा। रोड ट्रांसपोर्ट एंड हाइवेज मिनिस्ट्री ने कहा है कि इससे कार बायर्स को ऑटोमोबाइल मार्केट में उपलब्ध मोटर व्हीकल्स की क्रैश सेफ्टी का आकलन करने में आसानी होगी। इसके तहत कार मेकर्स स्वेच्छा से अपनी कारों की टेस्टिग करा सकेंगे। क्रैश टेस्ट में कार के प्रदर्शन के आधार पर स्टार रेटिंग दी जाएंगी। 

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