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डामर की जगह सीमेंट-कंक्रीट की रोड:सीमेंट रोड की लागत डामर से 2.5 गुना ज्यादा, फिर भी सस्ती… 25-30 साल तक नहीं टूटतीं, मेंटेनेंस ना के बराबर

हर साल बारिश में डामर की सड़कें उखड़ जाती हैं। इनकी रिपेयरिंग पर मोटा पैसा खर्च होता है, दुर्घटनाएं होती हैं, लोगों को परेशानियां होती हैं। देश और दुनिया के कई शहरों में सीमेंट की सड़कें हैं, जिनकी उम्र औसतन 25 से 30 साल तक होती है। इंदौर में 90% सड़कें सीमेंट की हैं। भोपाल में केवल 25%। हर बार की बारिश के बाद सड़कों की मरम्मत पर करोड़ों रुपए खर्च होते हैं और 6 से 8 महीने में दोबारा इनके वही हाल हो जाते हैं। सवाल ये है कि जब इंदौर 90% सड़कें सीमेंट की बना सकता है तो भोपाल क्यों नहीं? इसलिए इस साल सड़कों की मरम्मत शुरू होने के पहले आज से भास्कर ‘डामर की जगह सीमेंट-कंक्रीट रोड’ अभियान शुरू कर रहा है। अगले कुछ दिनों तक इस सीरीज में आप कई जानकारी परक खबरें पढ़ सकेंगे।

अबकी बार भी मानसून की बारिश ने शहर की लगभग 60 प्रतिशत सड़कों को गड्‌ढों, परेशानियों और खतरों में बदल दिया है। बारिश के सीजन में हर साल ऐसा ही होता आया है। इसकी इकलौती वजह है- ये सभी सड़कें डामर से बनी हैं, जो पानी भरते ही कंक्रीट पर अपनी पकड़ छोड़ देता है। एक्सपर्ट्स के अनुसार सीमेंट-कंक्रीट की सड़क इस समस्या का पक्का समाधान है। डामर के मुकाबले सीमेंट की सड़क बनाने पर ढाई गुना तक ज्यादा पैसा खर्च होता है, फिर भी ये डामर से सस्ती हैं, क्योंकि इनकी उम्र डामर सड़क से ज्यादा है। सालाना मेंटेनेंस पर बड़ा खर्च भी नहीं। जहां लैंडस्लाइड नहीं होता व रास्ता ज्यादा ऊबड़- खाबड़ नहीं हो, वहां सीमेंट की सड़कें बनाई जा सकती हैं।

दूसरे देशों में शहरों की सड़कें ही नहीं, हाईवे भी सीमेंट से बनाए जा रहे हैं। कोरिया में 62%, बेल्जियम में 40%, अमेरिका में 38% और जर्मनी में 26% सड़कें सीमेंट की हैं जबकि भारत में ये आंकड़ा मात्र 3% है। हालांकि 2015 के बाद से देश में सीमेंट की सड़कें बनाने का चलन बढ़ा है। देश में स्मार्ट सिटी और भारतमाला प्रोजेक्ट की सड़कें सीमेंट से बन रही हैं, लेकिन भोपाल में स्मार्ट सिटी की सड़कें भी डामर की हैं।

4 सवालों पर एक्सपर्ट्स के जवाब से समझें- सीमेंट की सड़क डामर से बेहतर कैसे?

Q. डामर सड़कें बारिश में क्यों टूटती हैं? क्या सीमेंट से बनाने पर गड्ढे नहीं होंगे?

A. बारिश में सड़कों पर पानी भरने से डामर की बॉन्डिंग टूट जाती है। वाहन चलने से कंक्रीट निकल जाती है व गड्‌ढे हो जाते हैं। सीमेंट में ये समस्या नहीं। चाहे जितने दिन तक पानी भरे, कंक्रीट से सीमेंट की बॉन्डिंग नहीं टूटती।

Q. दोनों की लागत में कितना फर्क है?

A. डबल लेन (1 किमी लंबाई व 7.5 मीटर चौड़ाई) डामर सड़क 80 लाख से 1 करोड़ रुपए में बनती है। सीमेंट से ये 2.25 से 2.50 करोड़ में बनती है। अल्ट्राथिन व्हाइट टॉपिंग, सीमेंट व स्टील स्लैग जैसी तकनीकों से लागत और कम हो जाती है।

Q. सीमेंट से सड़क बनाना महंगा है फिर भी इनका उपयोग सस्ता कैसे है?

A. डामर सड़क की औसत आयु 2.5 से 3 साल है। शहरों में ये एक साल भी नहीं टिकती। हर साल टेक कोटिंग करनी पड़ती है, जिस पर प्रति किमी 50 से 60 लाख खर्च होते हैं। सीमेंट सड़क 25-30 साल चलती है। मेंटेनेंस ना के बराबर होता है।

Q. क्या डामर की जगह सीमेंट की सड़कों से वाहनों को कोई नुकसान होता है?

A. वाहनों के लिए दोनों ही सड़कें एक जैसी हैं। सीमेंट से बने हाईवे पर हाई स्पीड में स्किडिंग व टायर फटने की आशंका रहती है, लेकिन शहरो में ऐसा नहीं होगा क्योंकि स्पीड लिमिट तय होती है। सीमेंट से शहरी सड़कें बनाने पर सीवरेज, पाइपलाइन व केबल खराब होने पर इन्हें बार-बार नहीं खोदा जा सकता है। इसका समाधान यह है कि स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट की तर्ज पर इन कार्यों के लिए अलग से डक्ट बनाए जाएं।

मिसाल; देश की पहली सीसी रोड 73 साल तक नहीं टूटी

देश में सीमेंट से पहली सड़क 1939 में मुंबई में मरीन ड्राइव पर बनाई गई थी। उस समय अनुमान था कि यह सड़क 50 साल चलेगी, लेकिन 73 साल तक नहीं टूटी। 2012 में इसे फिर से बनाया गया।

भोपाल की स्थिति

75% सड़कें हैं डामर की

  • 4,695 किमी कुल लंबाई है भोपाल शहर में सड़कों की।
  • 700 किमी मेन रोड हैं, जिनमें से 180 किमी मेन रोड ही सीसी हैं, 520 किमी डामर रोड।
  • 100 ‌करोड़ से ज्यादा खर्च होते हैं हर साल सड़कों की मरम्मत पर।

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