जर्जर और जंक लगी हुई पाइपलाइन से पानी की सप्लाई:10 साल में पेयजल योजनाओं पर 400 करोड़ खर्च, तब भी जर्जर पाइप से सप्लाई; फिर मौत

शहर में पेजयल से जुड़ी योजनाओं पर पिछले 10 सालों में 400 करोड़ रुपए खर्च किए जा चुके हैं। इसके बाद भी जर्जर और जंक लगी पाइपलाइन से घरों तक पेयजल की सप्लाई की जाती है। अगस्त में चांटीडीह, लिंगियाडीह और टिकरापारा में डायरिया से 7 मौतों के बाद अब इमलीपारा में मौत का मामला सामने आया है। पहली मौत के बाद प्रभावित इलाकों में पाइपलाइन में सुधार किया गया, लेकिन शहर के बाकी हिस्सों में ध्यान नहीं दिया गया। यही वजह है कि सितंबर में हुई बारिश के बाद अब इमलीपारा और कश्यप नगर इलाके में डायरिया फैली है। यहां नालियों की सफाई नहीं हो रही है।

6.50 लाख आबादी वाले शहर के बड़े हिस्से में जर्जर और जंक लगी पाइपलाइन से पीने के पानी की सप्लाई की जा रही है। हाल ही में सिम्स के माइक्रोबायोलॉजी डिपार्टमेंट की रिपोर्ट में यह बात सामने आई है कि नालियों से होकर गुजरने वाली पाइपलाइन से घरों तक जो पानी जा रही है, उसमें मल के कण मिले हैं। इमलीपारा में पिछले कुछ दिनों से घरों तक गंदा पानी आ रहा ​था। नगर निगम के स्वास्थ्य और जल विभाग ने ध्यान नहीं दिया। यही वजह है ​कि मोहल्ले में डायरिया की स्थिति बनी और एक की जान चली गई।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि पेयजल योजनाओं पर 400 करोड़ अधिक राशि खर्च करने के बावजूद निगम साफ पानी की सप्लाई नहीं कर पा रहा है। 301 कराेड़ रुपए ​सिर्फ अमृत मिशन पर खर्च किए गए हैं। 2007 से 2017 के बीच 81 करोड़ की जल आवर्धन योजना लाई गई थी। इसके बावजूद नालियों के बीच से गुजरी पाइप लाइन से लोगों को छुटकारा नहीं मिला। कहीं पाइप लाइन जर्जर है तो कहीं रबर पैबंद लगाकर काम चलाया जा रहा है। इमलीभाठा में अभी भी जर्जर और जंक लगी पाइपलाइन से पानी की सप्लाई हो रही है तो चिंगराजपारा, कुम्हारपारा समेत कई जगहों पर नालियों में डूबी पाइपलाइन की शिफ्टिंग नहीं की जा सकी है।

जानिए… कब कितनी पाइपलाइन बिछाई गई

  • बीडीए के कार्यकाल में पीएचई ने कुदुदंड पानी टंकी से पानी सप्लाई के लिए 80 लाख की योजना बनाई। तब 90 किलोमीटर पाइप लाइनें बिछाई गई। 1964 में पूरी हुई और 1967 में परिषद को हैंडओवर किया गया।
  • पीएचई ने 2007 से 2017 के बीच 81 करोड़ की जल आवर्धन योजना क्रियान्वित की। इसके अंतर्गत 177 किलोमीटर पाइप लाइन बिछाने पर 60 करोड़ रुपए खर्च किए गए। योजना अब तक हैंडओवर नहीं हुई है।
  • अमृत मिशन योजना 2017 में शुरू हुई। 276 किलोमीटर पाइप लाइन बिछाने पर 65 करोड़ रुपए खर्च किए गए।

सफाई में हर माह ऐसे खर्च कर रहा निगम, फिर भी नालियों की सफाई नहीं

  • 1.25 करोड़ – सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट (एमएसडब्ल्यू देल्ही सॉल्यूशन प्रा. लिमिटेड )
  • 1. 91 करोड़- मैकेनाइज्ड सफाई (दिल्ली लायन सर्विसेस)
  • 50 लाख – नाले-नालियों की सफाई पर
  • 30 लाख – नियमित सफाई कर्मचारियों के वेतन पर (सालाना)

अधिकांश पाइप लाइनें बदली गईं

निगम द्वारा दिसंबर 2022 में कराए गए सर्वे में जोन क्रमांक 1, 2 और 6 में 1950 मीटर पाइपलाइनें नाले, नालियों के बीच से गुजरी पाई गई। सर्वे का दूसरा पहलू यह भी है कि इसमें नगर निगम में 4 साल पहले शामिल 16 पंचायत क्षेत्र शामिल नहीं है। पीने के पानी का मामला गंभीर और संवेदनशील है। नल जल विभाग के इंजीनियरों का कहना है कि पाइपलाइन बदलने का काम जोन स्तर पर किया जा रहा है।

मोहल्लेवासियों ने कहा निगम की लापरवाही

इमलीपारा के रह​वासियों ने कहा कि नगर निगम की लापरवाही के कारण ही डायरिया से यहां एक महिला की मौत हो गई। उन्होंने कहा कि यहां न तो नालियों की सफाई होती है और न ही एंटी लार्वा और फागिंग का छिड़काव किया जाता है।

ननि के जिम्मेदारों का जवाब

​शिकायत मिली है : इमलीपारा में डायरिया फैलने की शिकायत मिली है। इस संबंध में जोन कमिश्नर बता पाएंगे।
– अनुपम तिवारी, हेल्थ अफसर, नगर निगम

उल्टी-दस्त है, इसका म​तलब यह नहीं कि डायरिया है : उल्टी-दस्त की शिकायत है। इसका ये मतलब नहीं है कि यहां डायरिया फैला है।
– राजकुमार मिश्रा, जोन कमिश्नर

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